उलटी गंगा ना बहे झुके न आसमान

उलटी गंगा ना बहे झुके न आसमान
मेरी मैया कभी न भूले भैया करना भगत का काम
उलटी गंगा ना बहे झुके न आसमान

मैया जी का काम यही है काम भगत का करना जी
इसको चिंता इक यही है भगतो को खुश रखना जी
मेरा बेटा मौज उडाये है इसका यही अरमान
उलटी गंगा ना बहे झुके न आसमान

जिस दिन से मैया की घर में इक तस्वीर लगाई जी
उस दिन से समजो हमने अपनी तकदीर जगाई है,
उस दिन से जुटा रही है मेरी खुशियों का समान
उलटी गंगा ना बहे झुके न आसमान

अगर नही मिलता मैया से ये जीवन बेकार था
लगता था मेरी किस्मत को मैया का इन्तजार था,
मेरे जैसा नही भड भागी मेरी माँ से हुई पहचान
उलटी गंगा ना बहे झुके न आसमान

वनवारी माँ के बारे में इतना ही केहना काफी,
माँ का हाथ रहे सिर पर तो कैसे काम रहे बाकी,
मेरी कारे आत्मा दिन भर मेरी मैया का गुणगान
उलटी गंगा ना बहे झुके न आसमान
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