पांच अंक जग में महान

आओ भगतो तुम को सुनाये पांच के अंक की लीला बताये
मान जाएगा सारा जहान पांच अंक जग में महान
पांच फल परशाद में पंच मेवा साथ में
होता देवो का भी पंच अस्नान पांच अंक जग में महान

पांच पकवानों का धर्म में महत्व है,पांच रतन पांच इन्द्रियां है
प्रभु वंदना में चरणों का अमृत पंचाअमृत बन के बहा है,
ग्रेह कुंडली का चकर पंचांग के मुख पर
सुरों में अचल रहे पंचम का स्थान पांच अंक जग में महान

कछा किरपान केश कंगे कड़े से सिख धर्म पांच से जुडा है
धरती आकाश अगनी जल और वायु सब पे पंच तत्वों की किरपा है
पांडव थे पांच और उँगलियाँ भी पांच है,
सरकार पांच वर्ष की है मेहमान
पांच अंक जग में महान

पांचो से बनती है पेहले पंचायात मुखियां संजीव सरपंच है
बेठ जिस चबूतरे पे लेते वो निरने पांच से ही सजता वो मंच है
पंच मुखी देव भी होती पंचारती,
नमाज पांच वक़्त पड़े मुश्ल्मान
पांच अंक जग में महान
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