दादा का चिमटा

श्री दादा देव दर्शन करके , सब दुखड़े मिट जाते है
झोली उनकी भर जाती , जो इनके आते है
रे दादा ने चिमटा गाड़ दिया
सब शीश झुकावे धुने पे ………..

इस धुने की महिमा न्यारी , बड़े बड़े सब कहते है
24 घण्टे जोत जगे यहाँ , सभी देवता रहते है
दादा से नाता जोड़ लिया
सब शीश झुकावे धुने पे ………..

गोरखनाथ गुरुजी की भी , कृपा यहाँ बरसती है
सब की आशा पूरी होती , चढे सभी में मस्ती है
ढँका जग में बजा दिया
सब शीश झुकावे धुने पे ………..

12 गाँव चढ़ावे भेली , चादर भी चढ़ाते है
फूलो से सिंगार करे , दादा को खूब सजाते है
जो आया सब का काम किया
सब शीश झुकावे धुने पे ………..

इस धुने की लगा भभूति , हरीश मगन सुख पा रहया
भूलन त्यागी शीश झुका , मस्ती में भजन सुना रहया
दादा तेरे बिना ना लागे जिया
सब शीश झुकावे धुने पे ………..
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