मन्ने अब के बचा ले मेरी माय बटाऊ आयो लेवण ने

मन्ने अब के बचा ले मेरी माय बटाऊ आयो लेवण ने,

पाँच कोठड़ी दस दरवाजा इण मंदिरए माय,
लुकति छिपती में फिरुँ छोड़े तो बैरी मन्ने नाय,
बटाऊ आयो लेवण ने
मन्ने अब के बचा ले मेरी माय....

हाथ जोड़ कन्या कहवे ओ सुन मायड़ म्हारी माय,
अबके बटाऊ ने पाछो भेजो फेर जावूंली बा रै साथ,
बटाऊ आयो लेवण ने,
मन्ने अब के बचा ले मेरी माय.....

कहवे डोकरी सुण ले पांवणा सुण ले म्हारी बात,
म्हारी कन्या भोली भली अबके कर दे ग़ुनाह माफ़,
बटाऊ आयो लेवण ने,
मन्ने अब के बचा ले मेरी माय....

कहवे पांवणो सुण ले डोकरी सुण ले म्हारी बात,
हुकुम होयो है धरम राज रो,
ढलती कोई मांझल रात,
बटाऊ आयो लेवण ने,
मन्ने अब के बचा ले मेरी माय....

सावण रा दिन सतरहा गया रे आयी नवेली तीज,
खेलण री म्हारे मन मन में रहगी,
संग की सहेल्या रे साथ,
बटाऊ आयो लेवण ने,
मन्ने अब के बचा ले मेरी माय....

मात पिता और कुटुंब कबीलो फेरयो सर पर हाथ,
सात भाया री बहन लाड़ली
कोई ना गया रे बाके साथ,
बटाऊ आयो लेवण ने
मन्ने अब के बचा ले मेरी माय....

कहत कबीर सुणो भाई साधो यो सासरिये जाए,
इण सासरिये सबने जाणों ले लो गुरु का नाम,
बटाऊ आयो लेवण ने
मन्ने अब के बचा ले मेरी माय,
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