कपि ने जपी माला सदा ही राम नाम की

कपि ने जपी माला सदा ही राम नाम की  
लगी लगन हमेशा ही उनको राम नाम की
कपि ने जपी माला सदा ही राम नाम की

राम नाम के परताप बजर देह पाई
राम नाम की सुधि इक पल भी ना बिसराई
दुहाई सदा होती है एक राम नाम की
कपि ने जपी माला सदा ही राम नाम की

राम नाम के प्रताप सागर को लांगा
राम जी से राम भक्ति एक ही वर माँगा
दिखाई छवि सीने में सदा ही राम नाम की
कपि ने जपी माला सदा ही राम नाम की

राम नाम के परताप लंका को जलाए,
सीता माँ का सन्देश राम को सुनाये
गाये सदा वो मीठी मीठी धुन राम नाम की
कपि ने जपी माला सदा ही राम नाम की

राम नाम के परताप संजीवनी लाये,
पर्वत उठा के प्राण लखन के बचाए
गुंजाये धुन वो लंका में देखो राम नाम की
कपि ने जपी माला सदा ही राम नाम की
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