काशी नगर के मेरे कबीरा

काशी नगर के मेरे कबीरा ऐसी दिखाई अनोखी वो लीला
भगतो को तारने खातिर लिए साहिब अवतार
और इस धरती पर आ कर किये चमत्कार
काशी नगर के मेरे कबीरा

गगन मंगल से उतरा परकाश पावन काशी नगर में,
लेहरता के जल में
कबीर साहिब सुंदर मलंगा रूप लिए शन वन में
विराजे फिर कमल में
गुजरे जब उस राह से नीरू और निम्न
देख चकित वो रेह गए आप की महिमा
खुशनसीब से वो दोनों दर्शन जो साहिब आप का मिला
भगतो को तारने खातिर लिए साहिब अवतार
और इस धरती पर आ कर किये चमत्कार
काशी नगर के मेरे कबीरा

कष्ट सारे मिट जाते है साहिब जाए जो आके शरण में
शीश झुकाए चरण में
अधूर बबिस्त कर्मी बन जाए वो शक्ति आप के वचन में
श्यान लगाये भजन में
तीनो लोको के सतगुरु आप हो स्वामी मन की बातो को जानते हो अंतर यामी
किरपा हुई अब के जिस पर भी मुरजाया फूल भी वो कैसे खिला
भगतो को तारने खातिर लिए साहिब अवतार
और इस धरती पर आ कर किये चमत्कार
काशी नगर के मेरे कबीरा

आतंक अत्याचार को मिटाने साहिब आये थे जग में,
सत्य कर्म भगती भाव को जगाने समाये आप जन जन में
प्रेम आपस में करने की देदो शिक्षा सतगुरु आप के भगतो को दे दो दीक्षा
मिल जुल कर रहे इक दूजे से मिट जाए मन में जो भी हो गिला
भगतो को तारने खातिर लिए साहिब अवतार
और इस धरती पर आ कर किये चमत्कार
काशी नगर के मेरे कबीरा
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