नाथ ये वो ही है

नाथ ये वो ही है रघुनाथ,
जिसने मारा है बाली......

नदियां जिनकी नसों का जाल है,
पेड़ पौधे तन के बाल है,
काल के भी वो तो काल है,
काल के भी वो तो काल है,
सीता रात काली,
जिन्होंने मारा है बाली,
नाथ ये वो ही हैं रघुनाथ,
जिसने मारा है बाली......

वो है पर्वत आप है तिनका,
नाथ विरोध किया है जिनका,
जग जाने है तीर जिनका,
जग जाने है तीर जिनका,
जाए नहीं खाली,
जिन्होंने मारा है बाली,
नाथ ये वो ही हैं रघुनाथ,
जिसने मारा है बाली......

तन मन से सीता है पति की,
ताकत तुम ना जानो सती की,
हैरत है हे नाथ मति की,
हैरत है हे नाथ मति की,
आई कंगाली,
जिन्होंने मारा है बाली,
नाथ ये वो ही हैं रघुनाथ,
जिसने मारा है बाली.......

चंदन रघुनन्दन का सहारा,
जड़ चेतन का वो ही गुजारा,
एक चमन है ये जग सारा,
एक चमन है ये जग सारा,
रघुवर है माली,
जिन्होंने मारा है बाली,
नाथ ये वो ही हैं रघुनाथ,
जिसने मारा है बाली......
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