हरि तेरा अजब निराला काम

( दाता थारे हाथ मे जीया जुण री डोर।
चेत के चाल कबीरा देवे कोण जमारो फोड। )

ओ हरी तेरो अजब नीरालो काम,
अजब नीरालो काम,
शावरीया तेरो अजब नीरालो काम,
सुख में सिमरन कोई नहीं करता,
दुःख में रेट तमाम,
ओ हरी तेरो …..

माया धन की बांध पोटली,
करता गरभ गुमान,
आ माया अंत काम ना आवे,
नही जाणे अज्ञान,
हरी तेरो.....

मालीक मेरा सब कुछ तेरा,
क्यो भुला इन्सान,
तेरा तुमसे पाकर के नर,
बण बेठा धनवान,
हरी तेरो…..

नर तन चोला पाकर भुला,
रटयो नही भगवान्,
क्या करता क्या करदे मालीक,
नही जाणे अज्ञान,
हरी तेरो…..

एक दिन माटी मे मील जावे,
हाड मास और चाम,
जुटी काया जुटी माया,
साचो है तेरो नाम,
हरी तेरो…..
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